AIBE 21 की तैयारी: भारतीय संविधान की 5 रिट (Writs) आसान भाषा में
भारतीय संविधान में जब किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) का हनन होता है, तो वह सीधे सुप्रीम कोर्ट (Article 32) या हाई कोर्ट (Article 226) जा सकता है। अदालतें इन अधिकारों की रक्षा के लिए जो विशेष कानूनी आदेश जारी करती हैं, उन्हें रिट (Writ) कहा जाता है।
भारतीय संविधान में कुल 5 प्रकार की रिट का प्रावधान है:
1. बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)
शाब्दिक अर्थ: "शरीर को प्रस्तुत करो" (To have the body of).
परिभाषा: यह रिट तब जारी की जाती है जब किसी व्यक्ति को पुलिस या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा गैरकानूनी तरीके से हिरासत (Illegal Detention) में रखा जाता है।
उद्देश्य: कोर्ट इस रिट के जरिए हिरासत में लेने वाले अधिकारी को आदेश देता है कि वह बंदी बनाए गए व्यक्ति को कोर्ट के सामने पेश करे और उसकी गिरफ्तारी का कानूनी कारण बताए। अगर गिरफ्तारी अवैध पाई जाती है, तो कोर्ट उसे तुरंत रिहा करने का आदेश देता है। यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सबसे बड़ा रक्षक है।
2. परमादेश (Mandamus)
शाब्दिक अर्थ: "हम आदेश देते हैं" (We Command).
परिभाषा: यह रिट तब जारी की जाती है जब कोई सरकारी अधिकारी, निचली अदालत, या सार्वजनिक संस्था (Public Body) अपने कानूनी कर्तव्यों (Public Duties) को निभाने में नाकाम रहती है।
उद्देश्य: इसके जरिए कोर्ट उस अधिकारी या संस्था को अपना काम कानूनी तरीके से करने का आदेश देता है। ध्यान रहे, यह रिट राष्ट्रपति, राज्यपाल या किसी निजी व्यक्ति के खिलाफ जारी नहीं की जा सकती।
3. प्रतिषेध (Prohibition)
शाब्दिक अर्थ: "रोकना" (To forbid).
परिभाषा: इसे आम बोलचाल में 'स्टे ऑर्डर' (Stay Order) भी कहा जाता है। यह रिट उच्च न्यायालयों (सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट) द्वारा निचली अदालतों (Lower Courts) या अर्ध-न्यायिक निकायों (Quasi-judicial bodies) को जारी की जाती है।
उद्देश्य: जब कोई निचली अदालत अपने अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) से बाहर जाकर किसी मामले की सुनवाई करने की कोशिश करती है, तो उच्च अदालत उसे वहीं पर रोकने के लिए यह रिट जारी करती है। (यह कार्यवाही के दौरान जारी होती है)।
4. उत्प्रेषण लेख (Certiorari)
शाब्दिक अर्थ: "पूर्णतः सूचित होना" या "प्रमाणित होना" (To be certified).
परिभाषा: यह रिट भी उच्च न्यायालयों द्वारा निचली अदालतों को ही जारी की जाती है, लेकिन यह तब जारी होती है जब निचली अदालत फैसला सुना चुकी होती है।
उद्देश्य: यदि किसी निचली अदालत ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर या प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के नियमों का उल्लंघन करके कोई गलत फैसला दे दिया है, तो उस फैसले को रद्द (Quash) करने के लिए और केस को समीक्षा के लिए ऊपर भेजने के लिए यह रिट जारी की जाती है।
5. अधिकार पृच्छा (Quo-Warranto)
शाब्दिक अर्थ: "आपका क्या अधिकार है?" (By what authority or warrant?).
परिभाषा: यह रिट किसी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ जारी की जाती है जो गैर-कानूनी तरीके से किसी सार्वजनिक पद (Public Office) पर बैठ गया है, जिसका वह हकदार नहीं है।
उद्देश्य: कोर्ट इस रिट के माध्यम से उस व्यक्ति से सवाल करता है कि वह किस अधिकार से इस पद पर कार्य कर रहा है। यदि वह व्यक्ति संतोषजनक जवाब नहीं दे पाता, तो कोर्ट उसे उस पद से हटा देता है।

Comments
Post a Comment