राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 1992
Rajasthan Public Examination (Prevention of Unfairmeans) Act, 1992 | APO 2026 Notes in Hindi
प्रस्तावना
राजस्थान में सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने तथा प्रश्नपत्र लीक एवं नकल जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 1992 (अधिनियम संख्या 27, 1992) बनाया गया। इसे राज्यपाल की स्वीकृति 8 नवम्बर 1992 को प्राप्त हुई।
इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य केवल नकल रोकना नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास बनाए रखना तथा योग्य अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करना भी है।
आज भले ही भर्ती परीक्षाओं के लिए 2022 का कानून अधिक चर्चित है, लेकिन Rajasthan APO जैसी परीक्षाओं में 1992 अधिनियम के मूल प्रावधानों से प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
---
अधिनियम का उद्देश्य
इस अधिनियम का उद्देश्य है—
सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के प्रयोग को रोकना।
प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं को रोकना।
परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता बनाए रखना।
दोषी व्यक्तियों के लिए दंड का प्रावधान करना।
परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता एवं निष्पक्षता बनाए रखना।
---
धारा 1 – संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारम्भ
धारा 1 के अनुसार—
1. इस अधिनियम का नाम राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 1992 है।
2. इसका विस्तार सम्पूर्ण राजस्थान राज्य तक है।
3. यह अधिनियम तुरन्त प्रभाव से लागू हुआ।
APO Exam Point
अधिनियम संख्या – 27
वर्ष – 1992
पूरे राजस्थान में लागू।
---
धारा 2 – परिभाषाएँ (Definitions)
यह अधिनियम की सबसे महत्वपूर्ण धारा है।
(क) Examination Centre (परीक्षा केन्द्र)
ऐसा कोई भी स्थान जिसे सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने के लिए निर्धारित किया गया हो। इसमें उस स्थान से जुड़े सम्पूर्ण परिसर (Premises) भी शामिल हैं।
उदाहरण: विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय भवन, परीक्षा केन्द्र का पूरा परिसर।
---
(ख) Public Examination (सार्वजनिक परीक्षा)
ऐसी परीक्षा जिसका उल्लेख इस अधिनियम की अनुसूची (Schedule) में किया गया है।
अर्थात हर परीक्षा स्वतः सार्वजनिक परीक्षा नहीं होगी; केवल वही परीक्षाएँ जिन्हें अनुसूची में शामिल किया गया है।
---
(ग) Unfair Means (अनुचित साधन)
यह अधिनियम की सबसे महत्वपूर्ण परिभाषा है।
"अनुचित साधन" से अभिप्राय है कि सार्वजनिक परीक्षा में प्रश्नों का उत्तर देते समय किसी भी प्रकार की अनधिकृत सहायता लेना, चाहे वह—
किसी व्यक्ति से हो,
किसी लिखित, मुद्रित या रिकॉर्ड की गई सामग्री से हो,
अथवा किसी अनधिकृत टेलीफोन, वायरलेस, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या अन्य गैजेट के माध्यम से हो।
ध्यान दें
1992 में भी अधिनियम ने "Electronic Gadget" शब्द शामिल किया था। इसलिए मोबाइल, ब्लूटूथ आदि भी इस परिभाषा के दायरे में आते हैं यदि उनका उपयोग अनधिकृत हो।
---
(घ) IPC के शब्द
जो शब्द इस अधिनियम में परिभाषित नहीं हैं लेकिन उस समय की भारतीय दंड संहिता (IPC) में परिभाषित थे, उनका वही अर्थ होगा जो IPC में दिया गया है।
---
धारा 3 – अनुचित साधनों के प्रयोग का निषेध
धारा 3 अत्यंत छोटी लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण धारा है।
इसमें स्पष्ट कहा गया है कि—
> कोई भी व्यक्ति किसी सार्वजनिक परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग नहीं करेगा।
यही इस अधिनियम का मूल प्रावधान है।
परीक्षा की दृष्टि से
यदि प्रश्न आए—
"किस धारा में अनुचित साधनों के प्रयोग पर रोक लगाई गई है?"
उत्तर होगा—
धारा 3
---
धारा 4 – प्रश्नपत्र का अनधिकृत कब्जा या प्रकटन
यह धारा प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए बनाई गई है।
इस धारा के अनुसार—
कोई ऐसा व्यक्ति जो विधि द्वारा अधिकृत नहीं है, वह प्रश्नपत्र वितरण के निर्धारित समय से पहले—
प्रश्नपत्र अपने कब्जे में नहीं रख सकता,
उसे प्राप्त नहीं कर सकता,
किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध नहीं करा सकता,
उसका प्रकटन (Disclosure) नहीं कर सकता।
इसका उद्देश्य
आज जिसे हम "Paper Leak" कहते हैं, उसी प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए यह प्रावधान बनाया गया था।
---
उदाहरण
यदि किसी को परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र मिल जाता है और वह उसे सोशल मीडिया या अन्य माध्यम से प्रसारित करता है, तो वह इस धारा के अंतर्गत उत्तरदायी हो सकता है।
---
अगले भाग में मैं धारा 5 से धारा 8, दंड, अनुसूची (Schedule), तथा APO Exam Tricks विस्तार से दूँगा।

0 Comments