किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 (Juvenile Justice Act, 2015) – राजस्थान APO हेतु संक्षिप्त नोट्स
परिचय
किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 का उद्देश्य कानून से संघर्षरत बच्चों (Children in Conflict with Law) तथा देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों (Children in Need of Care and Protection) के संरक्षण, पुनर्वास एवं सामाजिक पुनर्स्थापन की व्यवस्था करना है। यह अधिनियम 15 जनवरी 2016 से लागू हुआ।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
1. Child (बालक)
18 वर्ष से कम आयु का प्रत्येक व्यक्ति बालक कहलाता है।
2. Child in Conflict with Law (CCL)
वह बालक जिस पर अपराध करने का आरोप हो और अपराध के समय उसकी आयु 18 वर्ष से कम हो।
3. Child in Need of Care and Protection (CNCP)
अनाथ, परित्यक्त, शोषित, भीख मांगने के लिए विवश, तस्करी के शिकार, या संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे।
अपराधों का वर्गीकरण
(A) Petty Offence
जिस अपराध में अधिकतम सजा 3 वर्ष तक हो।
(B) Serious Offence
जिस अपराध में सजा 3 वर्ष से अधिक लेकिन 7 वर्ष तक हो।
(C) Heinous Offence
जिस अपराध में न्यूनतम सजा 7 वर्ष या उससे अधिक हो।
Juvenile Justice Board (JJB)
- धारा 4 के अंतर्गत गठन।
- अध्यक्ष: न्यायिक मजिस्ट्रेट/मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट।
- दो सामाजिक कार्यकर्ता सदस्य।
- कानून से संघर्षरत बच्चों के मामलों की सुनवाई करता है।
APO परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण
16–18 वर्ष आयु के बालक द्वारा किए गए जघन्य अपराध (Heinous Offence) में JJB प्रारंभिक मूल्यांकन (Preliminary Assessment) कर सकता है कि बालक को वयस्क के रूप में मुकदमे का सामना करना चाहिए या नहीं। यह 2015 अधिनियम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है।
Child Welfare Committee (CWC)
- धारा 27 के अंतर्गत गठन।
- देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों से संबंधित मामलों का निस्तारण करती है।
- बच्चे के पुनर्वास, संरक्षण और पुनर्स्थापन के आदेश देती है।
महत्वपूर्ण सिद्धांत (Section 3)
- Presumption of Innocence (निर्दोषता की धारणा)
- Best Interest Principle
- Dignity and Worth Principle
- Family Responsibility Principle
- Fresh Start Principle
- Non-Stigmatizing Approach
ये सिद्धांत APO परीक्षा में सीधे पूछे जाते हैं।
महत्वपूर्ण धाराएँ
| धारा | विषय |
|---|---|
| धारा 4 | Juvenile Justice Board |
| धारा 27 | Child Welfare Committee |
| धारा 10 | बालक को पुलिस लॉकअप या जेल में नहीं रखा जाएगा |
| धारा 15 | 16-18 वर्ष के बालक का Preliminary Assessment |
| धारा 18 | JJB द्वारा आदेश |
| धारा 74 | बालक की पहचान प्रकाशित करना निषिद्ध |
| धारा 75 | बालक पर क्रूरता |
| धारा 76 | बालक से भीख मंगवाना |
| धारा 80-81 | नशीले पदार्थ/शराब देना |
| धारा 101 | अपील |
धारा 74 – अक्सर पूछी जाने वाली धारा
किसी भी कानून से संघर्षरत बालक का नाम, फोटो, पता, विद्यालय आदि प्रकाशित नहीं किए जा सकते। उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान है।
APO Prelims के लिए One-Liner Facts
- JJ Act, 2000 को हटाकर JJ Act, 2015 लागू किया गया।
- अधिनियम 15 जनवरी 2016 से प्रभावी हुआ।
- 18 वर्ष से कम आयु = Child.
- 16–18 वर्ष के जघन्य अपराधियों के लिए Preliminary Assessment का प्रावधान।
- JJB = Children in Conflict with Law.
- CWC = Children in Need of Care and Protection.
- धारा 74 = पहचान उजागर करने पर प्रतिबंध।
संभावित APO प्रश्न
प्रश्न: JJ Act, 2015 के अंतर्गत 16–18 वर्ष के बालक द्वारा किए गए जघन्य अपराध का प्रारंभिक मूल्यांकन कौन करता है?
उत्तर: Juvenile Justice Board (JJB)।
प्रश्न: बालक की पहचान प्रकाशित करने पर रोक किस धारा में है?
उत्तर: धारा 74।
प्रश्न: Child Welfare Committee का गठन किस धारा के अंतर्गत होता है?
उत्तर: धारा 27।

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